संकेतस्थळावर प्रकाशित झालेल्या गझला
| शीर्षक | लेखक | प्रकाशन दिनांक |
|---|---|---|
| सिग्नल | विजय दि. पाटील | |
| खूप बोलू लागला अंधार नंतर | चित्तरंजन भट | |
| मागचे येतील नंतर | केदार पाटणकर | |
| विचित्र | जयदीप | |
| नवी गझल | विजय दि. पाटील | |
| अनुभव | जयदीप | |
| चांदणी, चंचला, कामिनी, सुंदरा, मोहिनी, अप्सरा, कोण आहेस तू | वैभव देशमुख | |
| अफवा | इंद्रजित उगले | |
| गझल | विजय दि. पाटील | |
| नाव रिकामी | केदार पाटणकर | |
| वाहते का ? हवाच आहे की ! | चित्तरंजन भट | |
| गझल | विजय दि. पाटील | |
| क्षण तो सोसाट्याचा होता | वैभव देशमुख | |
| आपण | ज्ञानेश. | |
| बोलली डोळ्यातुनी ती आणि कविता सुचत गेली... | जनार्दन केशव म्हात्रे | |
| थांग मनाचा कधी गवसला | चित्तरंजन भट | |
| शेर तुझ्यावर लिहिला आहे | जयदीप | |
| घर | ज्ञानेश. | |
| वाहते चुपचाप आहे खोल पाणी | चित्तरंजन भट | |
| कैफ हा ओसाड का इतका ? | चित्तरंजन भट |