संकेतस्थळावर प्रकाशित झालेल्या गझला
| शीर्षक | लेखक | प्रकाशन दिनांक |
|---|---|---|
| वाट पाहे दारावरी | आदित्य_देवधर | |
| पाहते | आदित्य_देवधर | |
| अवेळी अशा.. | ज्ञानेश. | |
| चंद्र झालो | आदित्य_देवधर | |
| माणसांना भार होती माणसे | निलेश कालुवाला | |
| ...घट एकांतात झरावा ! | प्रदीप कुलकर्णी | |
| दिसू लागले स्पष्ट जेवढे | चित्तरंजन भट | |
| माती | मिल्या | |
| भेटाया आल्या गझला, त्याच्या नंतर. | ह बा | |
| बाकी तसा कैदेत काही त्रास नसतो 'बेफिकिर' | बेफिकीर | |
| ... वंशातल्यांचे | अजय अनंत जोशी | |
| माणसाला म्हणे मारते भाकरी! | ह बा | |
| चालताना ........ | निलेश कालुवाला | |
| छोट्या बहराची गझल | आनंदयात्री | |
| चढलेल्यांना निम्मा करतो | अजय अनंत जोशी | |
| उसवित बसले बूड कवी हे ज्या झोळ्यांचे | ह बा | |
| काल ज्या क्षणी तुला मी पाहिले प्रिये | कैलास | |
| ऐकत नाही आता हे मन... | मधुघट | |
| कुणाकुणाला जरी समजला, मला परंतू कळला नाही... | सोनाली जोशी | |
| नव्हतो | आनंदयात्री |